Wednesday, August 10, 2005

हिन्दी सुभाषित सहस्त्र










परिस्थिति
(१). सुख में गर्व न करें , दुःख में धैर्य न छोड़ें ।
- पं श्री राम शर्मा आचार्य
(२). मनःस्थिति बदले , तब परिस्थिति बदले ।
- पं श्री राम शर्मा आचार्य
मनुष्यत्व
(३) .
मानव तभी तक श्रेष्ठ है , जब तक उसे मनुष्यत्व का दर्जा प्राप्त है । बतौर पशु , मानव किसी भी पशु से अधिक हीन है। - रवीन्द्र नाथ टैगोर
आदर्श
(४) .
आदर्श के दीपक को , पीछे रखने वाले , अपनी ही छाया के कारण , अपने पथ को , अंधकारमय बना लेते हैं। - रवीन्द्र नाथ टैगोर
कल्पना
(५) .
तर्क , आप को किसी एक बिन्दु "क" से दूसरे बिन्दु "ख" तक पहुँचा सकते हैं। लेकिन , कल्पना , आप को सर्वत्र ले जा सकती है। - अलबर्ट आइन्सटीन
प्रेम
(६) . व्यक्ति के बारे में राय बनाने वाले , व्यक्ति से प्रेम नहीं कर सकते।- मदर टेरेसा
(७) .यदि आप नृत्य कर रहे हों , तो आप को ऐसा लगना चाहिए कि , आप को , देखने वाला कोई भी आस-पास मौजूद नहीं है। यदि आप किसी संगीत की प्रस्तुति कर रहे हों , तो आप को ऐसा प्रतीत होना चाहिये कि , आप की प्रस्तुति पर , आप के सिवा अन्य किसी का भी ध्यान नहीं है । और , यदि आप सचमुच में , किसी से प्रेम कर बैठें हों , तो आप में ऐसी अनुभूति होनी चाहिए , कि , आप पहले कभी भी भावनात्मक तौर पर आहत नहीं हुए हैं। - मार्क ट्वेन

कला
(८) . कला एक प्रकार का एक नशा है,जिससे जीवन की कठोरताओं से विश्राम
मिलता है। - फ्रायड
कानून
(९) . कानून चाहे कितना ही आदरणीय क्यों न हो , वह गोलाई को चौकोर नहीं कह सकता। - फिदेल कास्त्रो
समाज
(१०) . सर्वविनाश ही , सहअस्तित्व का एकमात्र विकल्प है। - पं. जवाहरलाल नेहरू
(११) . धीरज , धर्म , मित्र अरू नारी । कष्ट समय परिखहुँ एहि चारी । - गोस्वामी तुलसीदास
जीवन
(१२) . किसी भी व्यक्ति का अतीत जैसा भी हो , भविष्य सदैव बेदाग होता है। - जान राइस
इतिहास
(१३) . इतिहास , असत्यों पर एकत्र की गयी सहमति है। - नेपोलियन बोनापार्ट
स्वास्थ्य
(१४) . स्वास्थ्य के संबंध में , पुस्तकों पर भरोसा न करें। छपाई की एक गलती जानलेवा भी हो सकती है। - मार्क ट्वेन
विविध
(१५) . स्पष्टीकरण से बचें । मित्रों को इसकी आवश्यकता नहीं ; शत्रु इस पर विश्वास नहीं करेंगे । - अलबर्ट हबर्ड
अतिथि
(१६) . मछली एवं अतिथि , तीन दिनों के बाद दुर्गन्धजनक और अप्रिय लगने लगते हैं । - बेंजामिन फ्रैंकलिन
आदर्श
(१७) . अपने उसूलों के लिये , मैं स्वंय मरने तक को भी तैयार हूँ , लेकिन किसी को मारने के लिये , बिल्कुल नहीं। - महात्मा गाँधी
स्वभाव
(१८) . विजयी व्यक्ति स्वभाव से , बहिर्मुखी होता है। पराजय व्यक्ति को अन्तर्मुखी बनाती है। - प्रेमचंद
मित्र
(१९) . अच्छे मित्रों को पाना कठिन है , वियोग कष्टकारी और भूलना असम्भव होता है। - रैन्डाल्फ
ज्ञान
(२०) . ज्ञान एक खजाना है , लेकिन अभ्यास इसकी चाभी है। - थामस फुलर
सफलता
(२१) . प्रत्येक व्यक्ति को सफलता प्रिय है लेकिन सफल व्यक्तियों से सभी लोग घृणा करते हैं । - जान मैकनरो
(२२) . असफल होने पर , आप को निराशा का सामना करना पड़ सकता है। परन्तु , प्रयास छोड़ देने पर , आप की असफलता सुनिश्चित है। - बेवेरली सिल्स

विचार और सौन्दर्य
(२३) . विचारों की गति ही सौन्दर्य है। - जे बी कृष्णमूर्ति
अतीत और स्मृति
(२४) . अतीत चाहे जैसा हो , उसकी स्मृतियाँ प्रायः सुखद होती हैं । - प्रेमचंद
मानव मस्तिष्क
(२५) . सर्वोत्तम मानव मस्तिष्क की पहचान है , किन्हीं दो पूर्णतः विपरीत विचार धाराऒं को साथ- साथ ध्यान में रखते हुए भी स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता का होना । - स्काट फिट्जेराल्ड
दर्शन
(२६) . आत्मदीपो भवः। - गौतम बुद्ध
(२७) . मेरा जीवन ही मेरा संदेश है। - महात्मा गाँधी
शांति
(२८) . यदि शांति पाना चाहते हो , तो लोकप्रियता से बचो। - अब्राहम लिंकन
(२९) . शांति , प्रगति के लिये आवश्यक है। - डा॰राजेन्द्र प्रसाद
धर्म
(३०). धर्म , व्यक्ति एवं समाज , दोनों के लिये आवश्यक है। - डा॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन
परिश्रम

(३१).चींटी से परिश्रम करना सीखें - अज्ञात




7 Comments:

At Wed Aug 10, 07:31:00 PM 2005, Blogger अनुनाद सिंह said...

वाह भाई वाह ! आप ने पहली बाजी मार ली ।

मारे सो मीर ।


अनुनाद

 
At Fri Aug 12, 04:08:00 AM 2005, Blogger राजेश कुमार सिंह said...

अनुनाद जी,पहले तो मेरा एक अपराधबोध दूर करें। जितना और जैसा , मुझे पता है , कि "अनुगूँज" में लिखने के लिये, चिठ्ठाकार , श्री पंकज नरुला द्वारा चयनित व आमंत्रित होते हैं। इस नाते मेरा यह प्रयास ,कहीं धृष्टता का परिचायक तो नहीं ?
-राजेश
(सुमात्रा)

 
At Thu Aug 18, 09:24:00 PM 2005, Blogger leanordtheobold3192 said...

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At Thu Aug 25, 07:14:00 AM 2005, Blogger अनुनाद सिंह said...

अति सुन्दर !!! इन सुभाषितों को सराहूँ या इन फूलों को ।

 
At Fri Aug 26, 11:27:00 AM 2005, Blogger अनूप शुक्ला said...

राजेश, सुभाषित से ज्यादा खुशी तुम्हें देख कर हुई.फोटो अपलोड करना सीख गये यह भी बहुत अच्छा लगा देखकर.अपनी फोटो जरा कुछ
बढिया वाली लगाओ. अनुगूंज का आयोजन तुम करना चाहते हो तो करो.पंकज (pankajnarula@gmail.com)तुम्हें अक्षरग्राम पर लिखने के लिये जरूरी सुविधा दे देंगे.लिखने संबंधी और कौनो समस्या हो तो बताओ.

 
At Sat Aug 27, 02:17:00 AM 2005, Blogger राजेश कुमार सिंह said...

प्रियवर,
फोटो देख कर आप को अच्छा लगा । फूल और सुभाषित , अनुनाद को अच्छे लग रहे हैं । कुल मिला-जुला कर , यह निष्कर्ष निकाल रहा हूँ कि, दोनों चीजें पसन्द लायक हैं।
जहाँ तक , और अच्छी फोटो को लगाने का सवाल है, मैं फोटो तो बदल सकता हूँ। लेकिन , अपना हुलिया कैसे बदलूँ ? सो, जो है, और जैसा होना चाहिये को थोड़ा मैन्युपलेट कर , एक ही लेवल पर ले आइये।
अब , एक काम की बात । अभी , कुछ देर पहले ही "ठेलुहा" पर की गयी टिप्पणी में अगली "अनुगूँज" की प्रस्तावना की बात मैंने लिखी है। पर , इस पर अमल लाने से पहले , आप की स्वीकृति वांछित होगी क्योंकि , विषय हैः "हैरी व हामिद"।
मुझे ऐसा लगता है , कि इस विषय पर , अभी भी काफी लोग कुछ न कुछ सोच रहे होंगे , जिसकी सामूहिक अभिव्यक्ति मजेदार होगी । इसलिये , क्यों न सबको मौका मिले , इस विषय पर , अपनी बात कहने का/रखने का ? क्या विचार है , आप का ?

-राजेश

 
At Sat Aug 27, 02:19:00 AM 2005, Blogger राजेश कुमार सिंह said...

अनुनाद जी,
न फूलों की सराहना करने की जरूरत है , न ही सुभाषितों की । बस प्रयासों की सराहना करते रहिये। एक ही तीर से सारे निशाने सध जाँयेगे ।
वैसे ,"अति सुंदर" पढ़ कर , मुझे ऐसा लगा , कि मेरा श्रम कुछ हद तक , सार्थक ही हुआ।
-राजेश

 

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